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*मेरो पहाड़*

 

*स्वावलंबी बनती मातृशक्ति: अभिलाषा स्वयं सहायता समूह से जुड़कर उद्यमी बनीं कलावती देवी, अन्य ग्रामीण महिलाओं को दे रही हैं प्रेरणा*

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*सशक्तीकरण की नई मिसाल: अभिलाषा समूह से आजीविका की ओर बढ़ते कलावती देवी के कदम*

ग्रामीण अंचल में महिलाओं की आर्थिक स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता की दिशा में स्वयं सहायता समूह एक अत्यंत प्रभावी माध्यम बनकर उभरे हैं। माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश की मातृशक्ति को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बनाने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए निरंतर प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है।

इसी क्रम में जनपद चम्पावत के ग्राम कठाड़ में मई 2024 में ‘अभिलाषा स्वयं सहायता समूह’ का गठन किया गया, जिससे जुड़कर कलावती देवी ने अपनी लगन और मेहनत के बल पर आजीविका संवर्धन की एक अनुकरणीय मिसाल पेश की है। समूह से जुड़ने के पश्चात उन्हें न केवल वित्तीय संसाधनों तक सुलभ पहुंच प्राप्त हुई, बल्कि एक सशक्त उद्यमी के रूप में स्थापित होने का सुअवसर भी मिला।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का स्पष्ट विजन है कि राज्य की महिलाओं को केवल स्थानीय रोजगार से न जोड़कर उन्हें स्वावलंबी ‘लखपति दीदी’ और सफल उद्यमी बनाया जाए। इसी प्रेरणा और मार्गदर्शन में अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने व स्वरोजगार स्थापित करने के उद्देश्य से कलावती देवी ने अभिलाषा स्वयं सहायता समूह के माध्यम से 1,50,000 रुपये का नगद क्रेडिट सीमा (सीसीएल) ऋण प्राप्त किया।

इस पूंजी का समुचित एवं योजनाबद्ध उपयोग करते हुए उन्होंने उन्नत नस्ल की गायों के साथ डेरी व्यवसाय की शुरुआत की। वर्तमान में उनके पास 7 गायें हैं, जिनसे प्राप्त दुग्ध उत्पादन का विपणन कर वे निरंतर लाभ अर्जित कर रही हैं। डेरी व्यवसाय के समानांतर उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाते हुए सब्जी उत्पादन का कार्य भी प्रारंभ किया, जिससे उनकी आय के स्रोतों में विविधता और स्थायित्व आया।

सतत प्रयास और प्रदेश सरकार के प्रोत्साहन से प्रति माह 55 हजार रुपये की सम्मानजनक आय

कलावती देवी के अथक परिश्रम, सही वित्तीय प्रबंधन और कृषि व डेरी क्षेत्र में अपनाई गई विविधीकरण की रणनीति के सुखद परिणाम सामने आए हैं।

आज वे इन गतिविधियों के सफल संचालन से प्रतिमाह लगभग 55,000 रुपये की सम्मानजनक आय अर्जित कर रही हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा ‘लखपति दीदी योजना’ एवं ‘सशक्त बहना उत्सव योजना’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों को लगातार दिए जा रहे संबल और बाजार प्रोत्साहन का ही परिणाम है कि कलावती देवी जैसी ग्रामीण महिलाएं आज आत्मनिर्भरता के नित नए आयाम स्थापित कर रही हैं।

उनकी यह सफलता न केवल उनके परिवार के जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार ला रही है, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर स्वावलंबी बनने के लिए प्रेरित कर रही है।

उनका यह प्रयास राज्य सरकार के ‘विकसित और आत्मनिर्भर उत्तराखंड’ के संकल्प को धरातल पर साकार करने की दिशा में एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

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