*मेरो पहाड़*
*‘स्थानीय संसाधन, स्थानीय उद्यम और स्थानीय रोजगार’ को साकार कर रही सरकार*
*स्थानीय उद्यम से आत्मनिर्भरता की ओर: श्रीमती जानकी देवी ने फलों से संवारा आजीविका का नया मार्ग*
माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड के संकल्प, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने तथा महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों से ग्रामीण महिलाओं को अपने हुनर और स्थानीय संसाधनों को आजीविका के साधन में बदलने का अवसर मिल रहा है।
इसी दिशा में चम्पावत जनपद के विकासखण्ड बाराकोट के ग्राम पन्या की श्रीमती जानकी देवी ने फल प्रसंस्करण आधारित लघु उद्यम स्थापित कर आत्मनिर्भरता की ओर महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।
श्रीमती जानकी देवी, का परिवार पूर्व से ही कृषि एवं पशुपालन पर निर्भर था। परिवार की सीमित आय के कारण घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण था।
घर में उपलब्ध फलों से जूस, अचार और जैम जैसे उत्पाद तैयार करने की इच्छा उनके मन में थी, लेकिन उचित मार्गदर्शन, संसाधनों और पूंजी के अभाव में वह इस कार्य को व्यवसाय का रूप नहीं दे पा रही थीं।
इसी दौरान ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना (REAP) के माध्यम से ग्राम पन्या में समूह एवं ग्राम संगठन स्तर पर बैठकों का आयोजन किया गया। परियोजना के मार्गदर्शन से श्रीमती जानकी देवी का चयन फल प्रसंस्करण आधारित उद्यम के लिए किया गया।
उनके उद्यम के लिए कुल 75,000 रुपये की धनराशि की व्यवस्था की गई, जिसमें 22,500 रुपये परियोजना सहायता, 37,500 रुपये बैंक ऋण तथा 15,000 रुपये लाभार्थी अंशदान के रूप में शामिल थे।
इस वित्तीय सहयोग एवं मार्गदर्शन का उपयोग करते हुए श्रीमती जानकी देवी ने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध फलों से जूस, अचार, जैम आदि उत्पादों का निर्माण एवं विक्रय शुरू किया। धीरे-धीरे उनके उत्पादों की मांग बढ़ी और घरेलू स्तर पर किया जाने वाला कार्य एक नियमित आय के साधन में परिवर्तित हो गया।
उद्यम के विस्तार के साथ वर्तमान में श्रीमती जानकी देवी को इससे लगभग 10 से 15 हजार रुपये प्रतिमाह की बचत हो रही है। इस आय से परिवार की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति में सहयोग मिलने के साथ उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता और निर्णय लेने की क्षमता भी मजबूत हुई है। जो कार्य पहले घर तक सीमित था, वही आज उनके परिवार के लिए आय और स्वरोजगार का माध्यम बन चुका है।
श्रीमती जानकी देवी परियोजना से मिले सहयोग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए बताती हैं कि उचित मार्गदर्शन, समय पर वित्तीय सहायता और आत्मविश्वास मिलने से उन्हें अपने विचार को उद्यम में बदलने का अवसर मिला। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए स्वरोजगार की अपार संभावनाएं हैं।
मा0 मुख्यमंत्री के महिला सशक्तिकरण, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों के सृजन और आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड के दृष्टिकोण के अनुरूप श्रीमती जानकी देवी की यह पहल इस बात का उदाहरण है कि स्थानीय संसाधनों और महिलाओं की क्षमता को अवसर एवं सहयोग से जोड़ा जाए तो छोटे-छोटे उद्यम भी स्थायी आजीविका का आधार बन सकते हैं।
श्रीमती जानकी देवी की सफलता “स्थानीय संसाधन, स्थानीय उद्यम और स्थानीय रोजगार” की अवधारणा को मजबूती प्रदान करती है। उनका यह प्रयास अन्य ग्रामीण महिलाओं को भी अपने कौशल और उपलब्ध स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित करता है।
