*मेरो पहाड़*
*मत्स्य तालाब निर्माण एवं सुधार पर 50 से 60 प्रतिशत तक अनुदान, पर्वतीय क्षेत्रों के मत्स्य पालकों को मिलेगा लाभ*
*जनपद की नदियों, झीलों एवं तालाबों में उन्नत प्रजाति के मत्स्य बीज का होगा संचय, मत्स्य संरक्षण एवं संवर्धन को मिलेगी नई गति*
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा निर्देशो के क्रम में जनपद में मत्स्य पालन को स्वरोजगार के सशक्त माध्यम के रूप में विकसित करने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में मत्स्य विभाग द्वारा मत्स्य उत्पादन बढ़ाने, जल स्रोतों के संरक्षण एवं संवर्धन तथा मत्स्य पालकों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं के अंतर्गत मत्स्य तालाब निर्माण, पुराने तालाबों के सुधार, मत्स्य बीज संचय तथा बत्तख एवं मुर्गी पालन जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। जिलाधिकारी मनीष कुमार ने कहा कि जनपद के पर्वतीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में मत्स्य पालन की अच्छी संभावनाएं हैं। राज्य सरकार की योजनाओं के माध्यम से स्थानीय लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने एवं उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन को बढ़ावा देने से ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर सृजित होंगे तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के साधन विकसित होंगे। उन्होंने संबंधित विभाग को पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं की जानकारी पहुंचाने एवं अधिक से अधिक लोगों को लाभान्वित करने के निर्देश दिए। जनपद मत्स्य प्रभारी अधिकारी त्रिभुवन मौर्या ने योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि मत्स्य बीज संचय कार्यक्रम के अंतर्गत उन्नत प्रजाति की मेजर कार्प एवं विदेशी कार्प मछलियों के फिंगरलिंग आकार के मत्स्य बीज का संचय किया जाता है। इसके तहत मनरेगा से निर्मित तालाबों, अमृत सरोवरों, झीलों तथा जनपद की प्रमुख नदियों लधिया, गौड़ी एवं लोहावती आदि में चिन्हित स्थानों पर मत्स्य बीज संचय एवं संरक्षण का कार्य किया जाता है। इस पहल से प्राकृतिक जल स्रोतों में मत्स्य संपदा के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने बताया कि पर्वतीय क्षेत्रों में छोटी एवं सीढ़ीदार कृषि जोतों को ध्यान में रखते हुए क्लस्टर आधारित पॉलीलाइनर मत्स्य तालाब निर्माण योजना के अंतर्गत 50, 100, 150 एवं 200 वर्ग मीटर आकार के तालाब बनाए जाएंगे। योजना में 100 वर्ग मीटर के तालाब निर्माण की मानक लागत 1 लाख रूपये निर्धारित है, जिस पर सामान्य वर्ग के मत्स्य पालकों को 50 प्रतिशत अर्थात 50 हजार रूपये तथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं महिला लाभार्थियों को 60 प्रतिशत अर्थात 60 हजार रूपये अनुदान दिया जाएगा। क्लस्टर आधारित मत्स्य पालन के लिए मत्स्यजीवी सहकारी समितियों, स्वयं सहायता समूहों एवं मंगल दलों को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने बताया कि मत्स्य तालाब सुधार योजना के अंतर्गत विगत तीन वर्षों में निर्मित ऐसे तालाबों, जिन्हें सुधार की आवश्यकता है, तथा प्राकृतिक अथवा दैवीय आपदा से क्षतिग्रस्त मरम्मत योग्य तालाबों का विभागीय मानकों के अनुसार सुधार किया जाएगा। इसके तहत 100 वर्ग मीटर के तालाब सुधार की मानक लागत 70 हजार रूपये निर्धारित है। इस पर सामान्य वर्ग के मत्स्य पालकों को 50 प्रतिशत अर्थात 35 हजार रूपये तथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं महिला लाभार्थियों को 60 प्रतिशत अर्थात 42 हजार रूपये अनुदान दिया जाएगा। इससे पुराने एवं क्षतिग्रस्त तालाबों को पुनः उपयोग में लाकर मत्स्य उत्पादन बढ़ाने में सहायता मिलेगी। उन्होंने बताया कि मत्स्य पालकों की आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करने के उद्देश्य से बत्तख बाड़ा एवं मुर्गी बाड़ा निर्माण योजना भी प्रस्तावित है। इसके अंतर्गत पूर्व से मत्स्य पालन कर रहे लाभार्थियों को 20 वर्ग मीटर के बत्तख बाड़ा अथवा मुर्गी बाड़ा निर्माण के लिए सहायता प्रदान की जाएगी। इसकी मानक लागत 1 लाख 40 हजार रूपये निर्धारित है, जिस पर सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को 50 प्रतिशत अर्थात 70 हजार रूपये तथा अनुसूचित जाति के लाभार्थियों को 60 प्रतिशत अर्थात 84 हजार रूपये अनुदान प्रस्तावित है। इससे मत्स्य पालक मछली उत्पादन के साथ बत्तख एवं मुर्गी पालन अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकेंगे।इसके अतिरिक्त मत्स्य संरक्षण एवं संवर्धन के साथ जल स्रोतों के संरक्षण के प्रति आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से जनपद के प्रत्येक विकासखंड में जनचेतना गोष्ठियों का आयोजन किया जाता है। इन गोष्ठियों के माध्यम से लोगों को मत्स्य पालन के लाभ, आधुनिक तकनीकों एवं जल संरक्षण के महत्व की जानकारी प्रदान की जाती है। जिलाधिकारी मनीष कुमार ने कहा कि मत्स्य पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के साथ ही स्वरोजगार एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर पर निवास करने वाले पात्र व्यक्ति तक पहुंचाना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है।
जनपद मत्स्य प्रभारी अधिकारी त्रिभुवन मौर्या ने मत्स्य पालन में रुचि रखने वाले किसानों, युवाओं, महिलाओं एवं स्वयं सहायता समूहों से योजनाओं का लाभ उठाने की अपील करते हुए कहा कि इच्छुक लाभार्थी विस्तृत जानकारी एवं आवेदन संबंधी प्रक्रिया के लिए मत्स्य विभाग से संपर्क कर सकते हैं।



