चंपावत: मौसम के साथ ही पेयजल समस्या को लेकर कभी भी फूट सकता है लोहाघाट में जन – भूचाल|



*मेरौ पहाड़*
लोहाघाट| इसे सिस्टम का दोष मानें या अधिकारियों का निकम्मापन, मुख्यमंत्री के मॉडल जिले में लोगों को चार-पांच दिन में भी थोड़ा पानी मिल रहा है| इसे मुख्यमंत्री को असफल करने का प्रयास लोग मान रहें हैं| यहा लंबे समय से जमे अधिकारियों की बहादुरी से क़ी जा रही कार्य संस्कृति के चलते ऐसे मुख्यमंत्री को जनरोष का सामना करने की स्थिति पैदा क़ी जा रही हैं, जो जिले के विकास के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं| निकाय चुनाव में भाजपा प्रत्याशी की रिकॉर्ड जीत का आधार ही नगर की पेयजल समस्या का तुरंत समाधान करने का लोगों को भरोसा मिला है| नगर पालिका के नवनिर्वाचित अध्यक्ष गोविंद वर्मा ने भले ही अभी शपथ नहीं ली है लेकिन चुनाव जीतने के बाद से ही वह नगर की पेयजल समस्या से लोगों को राहत देने के प्रयास में जुट गए हैं| इस समस्या को लेकर नगर के लोग उनके पीछे चट्टान की तरह खड़े हो गए हैं| नगर के लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि नगर की पेयजल की प्रतिदिन 2070 किलोलीटर की जरूरत है, इसके भंडारण के लिए 720 किलोलीटर क्षमता के टैक संस्थान के पास उपलब्ध हैं जबकि नए टैंक बनाने के विभाग के पास पर्याप्त भूमि उपलब्ध हैं, इसके बावजूद भी बरसों से यही गीत गाया जा रहा है कि भंडारण की क्षमता कम होने से यहां बरसात में भी लोगों को चौथे दिन पानी मिल पाता है| यही नहीं बनस्वाड गधेरे में 4 साल पूर्व लाखों रुपए खर्च कर ट्यूबवेल खोदा गया है लेकिन उसे आज तक चालू नहीं किया गया है|
उधर मुख्यमंत्री द्वारा सरयू लिफ्ट पेयजल योजना को स्वीकृत करने के बाद जल निगम द्वारा 106 करोड़ की डीपीआर तैयार की गई है| जल निगम के अधिशासी अभियंता बीके पाल के अनुसार डीपीआर में शासन स्तर पर लगी आपत्तियो को दूर किया जा चुका है| नगर के लोग सरयू लिप्ट पेयजल योजना के शीघ्र बनाने पर भी जोर दे रहे हैं| उनका कहना है क़ी इस लिफ्ट पेयजल योजना में ही लोहाघाट की सिवर लाइन का भविष्य टिका हुआ है| बहरहाल अभी नगर के लोगों के निशाने में जल संस्थान आ गया है, जिसकी कार्यशैली के चलते लोग आंदोलन का मूड बना चुके हैं| लोगों का साफ कहना है कि जल संस्थान पेयजल के लिए लोगों को परेशान कर मुख्यमंत्री की छवि को धूमिल करने का प्रयास कर रहा है|














