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टनकपुर से शिक्षा क्रांति की गूँज — “जिए पहाड़ निशुल्क पुस्तकालय अभियान” पहुँचा 25 पुस्तकालयों तक, अनिल चौधरी पिंकी बने युवाओं की प्रेरणा।

टनकपुर से शिक्षा क्रांति की गूँज — “जिए पहाड़ निशुल्क पुस्तकालय अभियान” पहुँचा 25 पुस्तकालयों तक, अनिल चौधरी पिंकी बने युवाओं की प्रेरणा।

*मेरो पहाड़*

टनकपुर।“शिक्षा वह शेरनी का दूध है, जो पीता है वह शेर की तरह दहाड़ता है।” डॉ. भीमराव अंबेडकर का यह कथन आज साकार कर रहा है जिए पहाड़ नागरिक निशुल्क पुस्तकालय अभियान। 20 अक्टूबर 2020 को टनकपुर तहसील से आरंभ हुआ यह अभियान, पूर्व उपजिलाधिकारी हिमांशु कफल्टिया जी के आशीर्वाद से शुरू हुआ और अब शिक्षा की मशाल बनकर 25 निशुल्क पुस्तकालयों तक पहुँच चुका है।
टनकपुर, खेतीखान, देवीधुरा, बनबसा, श्यामलताल सहित कई क्षेत्रों में बने ये पुस्तकालय हजारों छात्र-छात्राओं के सपनों को नई उड़ान दे रहे हैं। इस अनोखे अभियान के सूत्रधार हैं टनकपुर के युवा समाजसेवी अनिल चौधरी पिंकी, जो एक शिक्षक न होते हुए भी शिक्षा को जन-जन तक पहुँचाने का अदम्य संकल्प लिए हुए हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को न केवल किताबें मिल रही हैं, बल्कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए भी वे हमेशा तत्पर रहते हैं। आज जब शिक्षा संसाधनों की कमी से जूझ रही है, ऐसे समय में यह अभियान युवाओं के लिए आशा की किरण और समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।

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