स्वावलंबन से पहचान: बैंक सखी श्रद्धा तिवारी की प्रेरणादायक सफलता की कहानी।



*मेरो पहाड़*
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की दूरदर्शी सोच और ‘स्वावलंबन एवं स्वरोजगार’ की संकल्पना उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं के जीवन में एक नव-प्रभात बन रही है।


चंपावत ब्लॉक के टनकपुर स्थित छोटे से गांव (छीनीगोठ) की रहने वाली श्रद्धा तिवारी की कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि कैसे सही नीतियों और योजनाओं से जुड़कर एक साधारण महिला आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन सकती है।
वर्ष 2022 में श्रद्धातिवारी राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत स्वयं सहायता समूह से जुड़ी थीं। शुरुआती दिनों में बैठकों में हिस्सा लेते हुए उनमें बोलने, अपना परिचय देने और लोगों के सामने अपनी बात खुलकर रखने का एक नया आत्मविश्वास पैदा हुआ।
गांव-गांव जाकर अन्य महिलाओं को जोड़ते हुए उन्होंने नए समूहों का गठन किया। उनकी लगन और क्षमता को देखते हुए वर्ष 2025 में NRLM के अंतर्गत उन्हें ‘बैंक सखी’ के रूप में कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ।
NRLM द्वारा श्रद्धा को बैंक खाते खोलने, जमा-निकासी, आधार संबंधी कार्यों, पासबुक अपडेट और डिजिटल लेन-देन का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद उन्हें वित्तीय सखी के प्रशिक्षण के लिए देहरादून भेजा गया, जहाँ उन्हें उद्यमी महिलाओं को अपना उद्यम बढ़ाने के लिए आसानी से रु. 2 लाख तक का बैंक ऋण उपलब्ध कराने के बारे में शिक्षित किया गया।
बैंक सखी और बीसी (बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट) सखी के रूप में कार्य करते हुए श्रद्धा ने अपने गांव और आसपास की महिलाओं को बैंकिंग सुविधाओं से सीधे जोड़कर एक क्रांतिकारी बदलाव लाया। जनवरी 2026 के महीने में ही उन्होंने 718 डिजिटल और वित्तीय ट्रांजैक्शन सफलतापूर्वक संपादित किए, जिससे रु. 20,50,330 (बीस लाख पचास हजार तीन सौ तीस) का कुल कारोबार हुआ।
आज बैंक सखी के रूप में कार्य करते हुए श्रद्धा तिवारी प्रति माह 15,000 से 20,000 रुपये तक की नियमित आय अर्जित कर रही हैं। इससे न केवल उनकी पारिवारिक आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है, बल्कि समाज में उनका मान-सम्मान और सामाजिक कद भी बढ़ा है।
श्रद्धा अपनी इस सफलता का श्रेय राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और आजीविका मिशन को देती हैं। वे पूरे आत्मविश्वास और ईमानदारी के साथ आगे भी ग्रामीण महिलाओं और आमजन की सेवा करने का संकल्प लिए हुए हैं।












