भारत रत्नं डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की 11वीं पुण्यतिथि पर टनकपुर में आयोजित की गई श्रद्धांजलि सभा । डॉ कलाम के आदर्शों व कार्यो पर डाला गया प्रकाश ।



*मेरो पहाड़*
टनकपुर स्थित वीर माधो सिंह भंडारी उत्तहराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, देहरादून के टनकपुर परिसर में भारत के पूर्व राष्ट्रपति, महान वैज्ञानिक, भारत रत्न एवं “मिसाइल मैन” के नाम से विख्यात डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की 11वीं पुण्यतिथि के अवसर पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। तथा उनके आदर्शों व कार्यो पर प्रकाश डाला गया ।कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक, प्राध्यापकगण, अधिकारी, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राओं ने सहभागिता करते हुए डॉ. कलाम के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की ।


इस अवसर पर संस्थान के निदेशक प्रो. हरद्वारी लाल मंडोरिया ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम केवल एक महान वैज्ञानिक ही नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी विचारक, प्रेरणादायी शिक्षक, कुशल प्रशासक एवं सच्चे राष्ट्रभक्त थे। उन्होंने अपने ज्ञान, परिश्रम और विनम्र व्यक्तित्व से सम्पूर्ण विश्व में भारत का गौरव बढ़ाया। उनका जीवन युवाओं के लिए समर्पण, अनुशासन, ईमानदारी, नवाचार एवं राष्ट्र निर्माण का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि डॉ. कलाम सदैव युवाओं को बड़े सपने देखने तथा उन्हें साकार करने के लिए निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा देते रहे। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक नागरिक को जाति, धर्म, भाषा एवं क्षेत्रीय भेदभाव से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए देश की उन्नति एवं विकास में अपना योगदान देना चाहिए।
श्रद्धांजलि सभा के दौरान निदेशक प्रो. हरद्वारी लाल मंडोरिया ने डॉ. कलाम के वैज्ञानिक योगदान, शिक्षा के क्षेत्र में उनके अमूल्य कार्यों तथा विकसित भारत के उनके सपने पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारत के सामरिक एवं अंतरिक्ष कार्यक्रमों को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में डॉ. कलाम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। स्वदेशी मिसाइल तकनीक के विकास में उनके योगदान के कारण उन्हें “मिसाइल मैन ऑफ इंडिया” के रूप में विश्वभर में सम्मान प्राप्त हुआ। राष्ट्रपति के रूप में भी उन्होंने सदैव विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं एवं युवाओं को विज्ञान, नवाचार और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए प्रेरित किया। डॉ. कलाम का व्यक्तित्व सादगी, विनम्रता, कर्मनिष्ठा एवं सकारात्मक सोच का अद्भुत संगम था। वे मानते थे कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण का सबसे प्रभावी साधन है। उनके प्रेरक विचार—”सपने वे नहीं जो हम सोते समय देखते हैं, सपने वे हैं जो हमें सोने नहीं देते”—आज भी करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी कर्मचारियों ने डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के आदर्शों का अनुसरण करने, उत्कृष्ट शिक्षा एवं अनुसंधान को बढ़ावा देने, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के माध्यम से समाज और राष्ट्र की प्रगति में सक्रिय योगदान देने तथा एक विकसित, समृद्ध एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण हेतु निरंतर कार्य करने का सामूहिक संकल्प लिया।












