चम्पावत जिले के विभिन्न स्थानों में हर्षोल्हास से मनाया गया घुघुतिया पर्व । काले कव्वा काले घुघुतिया माला खाले के आह्वान के साथ बच्चों ने किया भरपूर मनोरंजन।



मेरो पहाड़
चम्पावत सहित कुमाऊँ के विभिन्न स्थानों में बच्चों का पसंदीदा त्यौहार घुघुतिया हर्षोल्हास से मनाया गया ।इस अवसर पर जगह जगह बच्चों द्वारा विभिन्न पकवानों से बनी मालाओं को गले मे डाल “काले कव्वा काले घुघुतिया माला खाले ” का आह्वान कर भरपूर मनोरंजन किया । घुघुतिया पर्व के सम्बंध मे जानकारों के अनुसार मान्यता है कि चन्द वंश के राजा कल्याण चन्द की लंबे समय तक कोई संतान नही हुई तब उन्होंने बागनाथ मन्दिर में पूजा अर्चना की जिसके बाद उन्हें पुत्र प्राप्त हुआ । कल्याण चन्द की पत्नी उसे घुघुती नाम से पुकारती थी । और उस नन्हे बालक को खुश कने के लिए कव्वो को बुलाती इसी के चलते कुमाऊँ भर में यह त्योहार घुघुती त्योहार के रूप में मनाया जाता है स्थानीय महिलाएवबताती है कि घुघुतिया पूरे कुमाऊँ का लोक पर्व है इसे अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ चम्पावत सहित पूरे कुमाऊँ में हर्षोल्हास से मनाया जाता है । इसके लिए पौष माह के अंतिम दिन आटा , सूजी, गुड़ को मिलाकर विभिन्न आकृतियों की घुघुती बनाकर अगले दिन बच्चों के गले मे डाला जाता है। और बच्चे बड़े हर्षोल्हास से कव्वों को बुलाकर काले कव्वा काले घुघुतिया माला खाले कह कर इस बाल त्यौहार को मनाते है ।












