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चंपावत: लोहाघाट में 6326 तथा चंपावत में 7657 वोटर चुनेंगे अपने अध्यक्ष व सभासद।

चंपावत: लोहाघाट में 6326 तथा चंपावत में 7657 वोटर चुनेंगे अपने अध्यक्ष व सभासद।

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*मेरो पहाड़*

लोहाघाट / चंपावत । लोहाघाट नगर पालिका में वर्ष 2019 में हुए चुनाव की तुलना में इस दफा 1616 मतदाताओं की संख्या में वृद्धि हुई है । वर्तमान में यहां 6326 मतदाता अब तक बने हैं। जबकि जिला मुख्यालय के 9 वार्डो वाली नगर पालिका में वर्ष 2019 में 6831 मतदाता थे। जो पांच साल में मात्र 616 ही बढ़ पाये है। वर्तमान में यहां 7657 मतदाता है। लोहाघाट नगर पालिका में सार्कीटोला वार्ड सबसे बड़ा है । जहां 1261 वोटर हैं जबकि 523 वोटरों वाला रिशेश्व वार्ड सबसे छोटा है। इसी प्रकार बजरंगबली वार्ड में 1108 , कचहरी वार्ड में 1054 ठाडादूंगा में 837, मीना बाजार में 836 , लोहावती वार्ड में 717 मतदाता है । इसी प्रकार चंपावत नगर पालिका में जूप सबसे बड़ा वार्ड है जहां 1167 तथा सबसे कम 418 मल्ली मादली में है । नागनाथ वार्ड में जहां 1167 तथा सबसे कम 418 मल्ली मादली में है । नागनाथ वार्ड में 1146 , बालेश्वर में 991, कनल गांव में 921 , छतार में 831, भैरवा में 639 तल्ली मादली में 597 तथा गोरलचोड में 776 मतदाता है।
लोहाघाट नगर के लोग पहली बार नगर पालिका के लिए अपने मतदान का प्रयोग करेंगे जबकि नगर के लिए 13 वें चेयरमैन को चुनेंगे। इधर भाजपा ने लोहाघाट के लिए गोविंद वर्मा एवं चंपावत के लिए प्रेमा पांडे के नाम पर अपनी मोहर लगा दी है। ओबीसी व्यक्ति गोविंद वर्मा को अनारक्षित क्षेत्र से पार्टी प्रत्याशी बनाए जाने के पीछे गोविंद कि सबको साथ लेने की राजनीति रही है। वर्ष 2014 में उनकी पत्नी लता वर्मा ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा जिसमें उन्होंने भाजपा प्रत्याशी को हराकर बाद में वह भाजपा में शामिल हो गई। इसी प्रकार वर्ष 2019 के चुनाव में स्वयं गोविंद वर्मा ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा जिसमें उन्होंने भाजपा प्रत्याशी को हराकर बाद में व भाजपा परिवार में शामिल हो गये । अपने सरल एवं आत्मीय स्वभाव के , सर्वसुलभ रहने वाले गोविंद कि कामयाबी का यही राज रहा है। तथा अपनी अध्यक्ष के कार्यकाल में बहुत सारे विकास के कार्य कराये। उधर चंपावत में महिला आरक्षित सीट पर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमा पांडे पर पार्टी नेताओं ने भरोसा किया है। महिला प्रत्याशी होने पर यहां का मतदाता सबसे पहले यह देखता है कि उसका रिमोट कंट्रोल कैसा है ? इसी के आधार पर वह अपना मन बनाता है। प्रेमा पांडे ने बगैर रिमोट कंट्रोल के जिला पंचायत जैसी महत्वपूर्ण संस्था का अध्यक्ष पद बहुत ही विवेक एवं शालीनता के साथ संचालित किया। उनके कार्य व व्यवहार को लोग बहुत याद करते है । वैसे उनके पति एडवोकेट शंकर दत्त पांडे नगर एवं क्षेत्र की हर सामाजिक , धार्मिक, सांस्कृतिक गतिविधियों में प्रथम पंक्ति में खड़े दिखाई देते हैं । प्रेमा ऐसी प्रत्याशी हैं जिन्हें स्वयं लोग एवं उनके प्रशंसक उन्हें चुनाव मैदान में घर से खींच कर लाए हैं ,ताकि नगर को एक सुयोग्य नेतृत्व मिल सके ।


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