टमाटर की खेती से बदल रही ग्रामीणों की तकदीर । सिंचाई व संसाधनों की उपयोगिता से आर्थितिकी में हो रहा सुधार ।





*मेरो पहाड़*
चम्पावत जिले के पाटी विकास खण्ड के सुदूरवर्ती क्षेत्रों के पटनगांव, बांस बस्वाड़ी, जमनटाक आदि गाँव के ग्रामीणों की तकदीर टमाटर की खेती ने बदल दी है । खेतो में सिचाई के साधन व यातायात सहित विभिन्न संसाधनों के उपयोग से ग्रामीणों की आर्थितिकी में भी सुधार हो रहा है । आज सब्जी मंडियों में टमाटर इन गांवों के नाम से बिकता है।इन गांवों में 300 से अधिक लोगों की आजीविका का मुख्य साधन टमाटर एवं बेमौसमी सब्जियों का उत्पादन रहा है। लोक सभा चुनाव के दौरान सेक्टर मजिस्ट्रेट के रूप में ग्रामीणों से रूबरू हुए पीजी कॉलेज के एनसीसी अधिकारी लेफ्टिनेंट डॉक्टर कमलेश सक्टा के अनुसार पटनगांव बांस बस्वाड़ी,जमनटाक में हर व्यक्ति बेमौसमी सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं। यदि उन्हें सिंचाई व सुगम ट्रांसपोर्ट सुविधा मिले तो उत्पादकों की आय बढ़ सकती है। गांव के कीर्ति बल्लभ, विपिन चंद्र, सतीश जोशी,नारायण दत्त, रमेश तिवारी, खिलानंद, प्रताप बिष्ट आदि कई ऐसे काश्तकार हैं जो अकेले एक एक लाख रुपए का टमाटर बेचते आ रहे हैं। गत वर्ष टमाटर का अच्छा बाजार भाव मिलने से यहां के उत्पादकों का हौसला बढ़ा है। उद्यान विभाग इन गांवों के लोगों की मदद करता आ रहा है। शुरुआत में पटनगांव के लोगों ने यह काम शुरू किया, उन्हीं से प्रेरित होकर अन्य गांव के लोगों ने इसे अपना व्यवसाय बनाया है। यहां के लोग कृषि विज्ञान केंद्र के डॉक्टर ए के सिंह का ही नाम जानते हैं। यहां के काश्तकार मल्चिंग, पॉली हाउस, पॉली टनल, यू टनल आदि से सब्जी उत्पादन के बारे में जानते तक नहीं हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि बलागड़ी गधेरे से यदि सिंचाई सुविधा दी जाए तो सब्जी उत्पादन का प्रक्षेत्र काफी बढ़ जाएगा। जंगली जानवरों से भी सुरक्षा की आवश्यकता है।






