×

मानसून सीजन आते ही फिर सताने लगा बेलखेत के ग्रामीणों को बाढ़ का डर । एक साल बाद भी नहीं शुरू हो सके झूला पुल व बाढ़ सुरक्षात्मक निर्माण कार्य । ग्रामीणों ने कहा कब तक ट्रॉली के सहारे करेंगे आवागमन ।

मानसून सीजन आते ही फिर सताने लगा बेलखेत के ग्रामीणों को बाढ़ का डर । एक साल बाद भी नहीं शुरू हो सके झूला पुल व बाढ़ सुरक्षात्मक निर्माण कार्य । ग्रामीणों ने कहा कब तक ट्रॉली के सहारे करेंगे आवागमन ।

खबरे शेयर करे :

*मेरो पहाड़*

चंपावत जिले के बेलखेत गांव में एक वर्ष बीतने के बाद भी बाढ़ सुरक्षात्मक और झूला पुल के निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सके जिससे ग्रामीणों को इस बार भी मानसून सीजन से पहले ही डर सताने लगा है। पिछली बार मानसून के दौरान हुई बारिश ने बेलखेत गांव में तबाही मचा कर रख दी थी। जिससे झूला पुल बहने के साथ-साथ ग्रामीणों के उपजाऊ खेत खलिहान सब आपदा की भेंट चढ़ गए थे। कई दिनों तक ग्रामीण नदी के उस पार ही फंस गए थे। एक साल का समय बीतने के बाद भी बाढ़ सुरक्षात्मक कार्य और झूला पुल का निर्माण नहीं बनने के कारण ग्रामीणों के लिए अब मुसीबत खड़ी हो गई है। जिसको लेकर ग्रामीणों में काफी नाराजगी है।
जिला मुख्यालय से 34 किलोमीटर दूर बेलखेत गांव में बीते वर्ष हुई बारिश से काफी नुकसान हुआ है। ग्रामीणों को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाला मात्र एक झूला पुल भी आपदा भेंट चढ़ गया। जिससे ग्रामीणों को काफी दिनों तक नदी के उस पार ही अपना जीवन यापन करना पड़ा। हालांकि जिला प्रशासन की ओर से ग्रामीणों की समस्या को ध्यान में रखते हुए ट्रॉली निर्माण कार्य किया गया। लेकिन एक वर्ष का समय बीतने के बाद भी बेलखेत गांव के लिए बाढ़ सुरक्षा और झूला पुल का निर्माण शुरू नहीं होने से ग्रामीणों में काफी नाराजगी है। ग्रामीणों ने कहा कि अनेक बार जिला प्रशासन से कहने के बाद भी अभी तक कोई कार्य नहीं हुआ है। मानसून सीजन फिर शुरू होने वाला है। जिससे ग्रामीण भय के साए में जीवन यापन कर रहे हैं। ग्रामीण दशरथ सिंह बोहरा, रवि बोहरा, शोभन सिंह, शेर सिंह, मनोहर सिंह, मोहन सिंह, नवीन सिंह, रोशन सिंह, शंकर सिंह, अर्जुन सिंह, अंगद सिंह आदि ने बताया कि बाढ़ सुरक्षा और झूला पुल कार्य शुरू न होने से इस बार मानसून से पहले ही डर सताने लगा है। उनका कहना है कि मौसम विभाग ने इस बार औसत से अधिक बारिश का पूर्वानुमान किया है अगर मानसून सीजन में बारिश ज्यादा होती है तो गांव में कोई बड़ी घटना घट सकती है। कोइराला नदी का रुख सीधा गांव की ओर बढ़ रहा है। पिछली बार ग्रामीणों की उपजाऊ भूमि पूरी बह गई थी । ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से जल्द से जल्द झूला पुल बनाने और बाढ़ सुरक्षात्मक कार्य करने की मांग उठाई थी। लेकिन अभी तक किसी भी प्रकार का कोई काम न होने से ग्रामीणों ने नाराजगी व्यक्त की है। ग्रामीणों ने कहा कि इस बार समय रहते सुरक्षात्मक कार्य नहीं होते हैं तो आने वाले दिनों में कोई बड़ी घटना घट सकती है।
मानसून सीजन में स्कूल भी नहीं जा पाते हैं बच्चे
बेलखेत गांव में मानसून सीजन के दौरान स्कूल कॉलेज जाने वाले बच्चों के लिए भी काफी दिक्कत सामने आती है। नदी का पानी अधिक होने के कारण बच्चों की स्कूल की पढ़ाई भी बाधित हो जाती है। नदी के इस तरफ स्कूल और कॉलेज होने के कारण मानसून सीजन में बच्चों के लिए नदी को पार कर स्कूल जाना खतरे से खाली नहीं है। वही लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता एम सी पलड़िया ने कहा कि
झूला पुल की डीपीआर तैयार की जा रही है। बाकी टेस्टिंग सहित अन्य काम पूरे कर लिए गए हैं। जिसे फाइनल होने के बाद शासन को भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।


खबरे शेयर करे :