चिकित्सा क्षेत्र में तीन बार कायाकल्प पुरस्कार मिलने के बाद भी गुमदेश के लोगों को नही मिल पा रही बेहतर चिकित्सा सुविधा ।






*मेरो पहाड़*
लोहाघाट (चम्पावत) लोहाघाट विकासखण्ड का पुल्ला हिंडोला चिकित्सालय तीन बार सरकार की कायाकल्प योजना से पुरस्कृत होने के बाद भी गुमदेश के लोगों बेहतर चिकित्सा सुविधा नही दे पा रहा है । तीस हजार की आबादी वाले इस क्षेत्र में 75 साल पहले सन 1948 में पुलहिंडोला में जिला परिषद की डिस्पेंसरी का उद्घाटन अल्मोड़ा से सिविल सर्जन जिन्हें आज सीएमओ कहते हैं, ने किया था । तब रौल गांव की पन्ना देवी ने अपना दस तौले का सोने का हार सिविल सर्जन को देते हुए कहा था कि यहां ऐसा अस्पताल बना दो जिससे गुमदेश के लोगों का भला हो सके। उसी दिन अस्पताल में लगाने के लिए चांदी का एक ताला – चाबी भी यादगार स्वरूप दिया गया जो आज भी इस चिकित्सालय में शो-केस में रखकर उसे सुरक्षित रखा गया है। वर्तमान में इस डिस्पेंसरी को पीएचसी का दर्जा मिल चुका है क्षेत्र की तीस हजार से अधिक आबादी के बीच इस अस्पताल में आज भी महिलाओं के प्रसव जैसी बुनियादी सुविधा नहीं है जिसके लिए उन्हें लंबी दूरी तय कर लोहाघाट जाना पड़ता है। यह बात अलग है कि अपनी विशिष्ट सेवा के लिए विभाग में पहचान रखने वाले वरिष्ठ फार्मासिस्ट मनोज आर्या के यहां आने के बाद अस्पताल को तीन बार कायाकल्प पुरस्कार मिल चुका है। बुजुर्ग भगवत सिंह धोनी ने बताया कि शुरुआती दौर में तो यहां मिलिट्री के रिटायर डॉक्टर सेवा के लिए आया करते थे। 75 साल बाद भी गुमदेश के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिलने का पन्ना आमा का सपना आज भी पूरा नहीं हो पाया है। जबकि
पीएचसी के पास पर्याप्त भूमि उपलब्ध है जहां अस्पताल के पुराने भवन का जिर्णोद्धार किया गया है यदि यहां महिला चिकित्सक समेत बाल रोग एवं फिजिशियन के पद सृजित कर अस्पताल का विस्तार करने के साथ आवासीय भवन बनाए जाए तो लोगों को और बेहतर सुविधा मिल सकती है। एक ही अस्पताल में एलोपैथी, आयुर्वेद एवं होम्योपैथिक तीनों पैथिया संचालित कि जा रही हैं तीनों ही पैथियों के यहां डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ नियुक्त किए गए है। लेकिन यहां आयुर्वेद के डॉक्टर वर्मा रह रहे हैं। पैरामेडिकल स्टाफ के लिए भी यहां कोई सुविधा नहीं है । वही मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ के के अग्रवाल का कहना है कि चुनाव के बाद वे स्वयं पीएचसी का निरीक्षण कर वहां की जरूरतों का जायजा लेने के बाद वह सभी उपाय करेंगे जिससे गुमदेश के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिलने से उनकी लोहाघाट – चंपावत की दौड़ समाप्त हो सके।






