उत्तराखंड में अपनी विशिष्ट शान व पहचान बनाए हुए हैं लोहाघाट का स्वामी विवेकानंद राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय।





*मेरो पहाड़*
लोहाघाट।शिक्षण संस्थान छात्र छात्रोंओ के सर्वांगीण विकास का एक ऐसा उद्गम होता है ,जहां कोरा कागज लेकर आए छात्रों के भविष्य की संभावनाओं के मार्ग तलाश कर उनके जीवन की दशा और दिशा तय की जाती है ।यदि संस्थाओं के नाम के आगे किसी महापुरुष का नाम जुड़ जाए तो वहां का वातावरण और अभामंडित हो जाता है। युग पुरुष स्वामी विवेकानंद जी के चरण पढ़ने से जहां अद्वैत आश्रम मायावती दुनिया के लिए अध्यात्म,अद्वैत वेदांत का उद्गम बनकर नई रोशनी दे रहा है,ठीक इसी प्रकार लोहाघाट के राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के नाम के आगे स्वामी विवेकानंद जी का नाम जुड़ने के बाद यहां अध्यनरत छात्र-छात्राओं व प्राध्यापकों के वैचारिक दृष्टिकोण ,सोच,कार्य संस्कृति में सतही परिवर्तन आने के साथ इस शिक्षण संस्था में प्रवेश करते ही यहां से त्याग, समर्पण एवं लगन की महक आने लगती है। दरअसल महाविद्यालय के नाम के साथ स्वामी जी का नाम जोड़ने का एक संयोग ही था कि वर्ष 1979 में महाविद्यालय की स्थापना के बाद क्षेत्र के वरिष्ठ पत्रकार गणेश दत्त पांडे ने क्षेत्रीय दौरे पर आए यूपी के उच्च शिक्षा निदेशक गोपी कृष्ण अरोड़ा के सम्मुख विचार रखा की हमारे महाविद्यालय के नाम के आगे स्वामी विवेकानंद जी का नाम जोड़ दिया जाए तो इसमें आपकी क्या राय है? इस प्रस्ताव को सुनकर श्री अरोड़ा इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने कहा अभी मुझे अपनी भावनाओं को लिखित रूप में दे।
इसके 14 दिन बाद यूपी सरकार से इस आशय की स्वीकृति पत्र यहां आ गया था। महाविद्यालय के एक प्रवक्ता डॉक्टर प्रकाश लखेरा के निर्देशन में छात्र छात्राओं द्वारा स्वामी जी के जीवन चरित्र पर शोध भी कीएजा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र की एक छात्रा डॉक्टर रेखा मोनी ने तो अपना शोध कार्य पूरा कर उत्तराखंड में अपना पहला नाम दर्ज किया है इसके अलावा अन्य छात्राएं भी स्वामी जी के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर शोध कर रही है।महा मनीषी का नाम महा विद्यालय में जुड़ने से यहां अध्यनरत छात्र-छात्राओं के आचार,विचार व संस्कारों में बदलाव आने के साथ उनमें विनम्रता व लगन का ऐसा भाव पैदा होने लगा की धरती से आसमान छूने के स्वप्न देखने लगे हैं

महाविद्यालय की प्राचार्य डॉक्टर संगीता गुप्ता का कहना है कि शुरुआती दौर में जब वह प्राचार्य के रूप में यहां आई थी तो स्वामी जी का नाम देखते ही उनमें नई ऊर्जा का संचार होने के साथ स्वयं को गर्व होने लगा। लंबे समय से शैक्षिक जगत से जुड़ी होने के कारण यह छात्र-छात्राओं में अनुशासन,आगे बढ़ने की ललक एवम प्रतिस्पर्धा का भाव है यहां तक की छात्र संघ चुनाव जितनी शालीनता एवं आम सहमति से यहां होते हैं ,ऐसी मिसाल कम देखने को मिलती है।

उच्च शिक्षा निदेशक डॉक्टर सीडी सूंठा महाविद्यालय में अपनी विशिष्ट सेवा को स्मरण करते हुए कहते हैं की स्वामी जी के नाम जुड़ने से यहा भव्यता व दिव्यता ही नहीं आई बल्कि यह महाविद्यालय सकारात्मक ऊर्जा के स्रोत से ऐसे भरा हुआ है कि सभी एक ही लगन में मगन है कि किस प्रकार हम समाज व राष्ट्र के काम आ सके ।






